कांग्रेस का "किसान आन्दोलन" ! इनमें कौन किसान लगता है, जींस पैंट - बूट वाले किसान कबसे है !!


वाह रे कोंग्रेसी हितैसी होने का ढोंग करने वाले ग़द्दारों किसानों के शुभ चिंतक,यह कोंग्रेस के MLA अब्दुल सत्तार है जो किसनो को गाली दे रहे है और मार पिट कर रहे है। ये है किसानों के हितैषी बनेंगे शर्म करो l


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फ़ोटो में दिखने वाला यह व्यक्ति नागपुर में कांग्रेस का नेता है ! इसने गरीब किसानों से दूध छीन लिया और इसे सड़क पर फेंक दिया !
जब किसानो ने रोकने की कोशिस किया और पुलिस बुला लिया तब कांग्रेसी नेता पुलिस वालों से भी दुर्व्यवहार किया और धमकी दी !
यह कांग्रेस है किसानों की हमदर्द, आप खुद ही देख लीजिये ! बन्द करो कोंग्रेसियो किसानों के साथ ऐसा दुर्व्यहार.! जब कोंग्रेस का अध्यक्ष ही ऐसी तस्वीरें डाल चुका है तो कार्यकर्ता से क्या उम्मीद करे. !!
शर्म आनी चाहिए. ! वैसे रस-गोरस का श्राप बहुत बुरा लगता है !
सोर्स-ANI न्यूज़..#NSB







दो किलो दूध भी सड़क पर फेंक दिया   

बच्चा बेचारा हाथ जोड़ता रहा लेकिन किसी ने एक ना सुनी
किसी की मजबूरी भी हो सकती है  
आन्दोलन के नाम पर अब बदमाशी की जा रही है
किसानो को आन्दोलन के नाम पर बदनाम किया जा रहा है


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Bjp Tarun Sengupta

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रानी पद्मावती की जौहर गाथा, उन हिन्दू बहनों और बेटियों के लिए जिन पर वर्तमान मलेच्छों की बुरी नज़र है। "

जाने, रानी पद्मावती की जौहर गाथा,,,
यही वो असंख्य नमन करने वाला स्थल है, जिसमें महारानी पद्मावती ने म्लेच्छ आक्रान्ताओं से अपनी रक्षा करने के लिए धधकती ज्वाला के कुंड में छलांग लगाई थी।
चित्तौड़गढ़ के किले में आज उस कुंड की ओर जाने वाला रास्ता बेहद अंधेरे वाला है जिस पर कोई जाने का साहस नहीं करता। उस रास्ते की दीवारों तथा कई गज दूर भवनों में आज भी कुंड की अग्नि के चिन्ह और उष्णता अनुभव किया जा सकता है। विशाल अग्निकुंड की ताप से दीवारों पर चढ़े हुए चूने के प्लास्टर जल चुके हैं।
चित्र में कुंड के समीप जो दरवाज़ा दिख रहा है कहा जाता है की रानी पद्मावती वही से कुंड में कूद गयी थी। स्थानीय लोग आज भी विश्वास के साथ कहते हैं कि इस कुंड से चीखें यदा-कदा सुनायी पड़ती रहती है और सैंकड़ों वीरांगनाओं की आत्माएं आज भी इस कुंड में मौजूद हैं। वो चीखें आज के युग में एक सबक है, "उन हिन्दू बहनों और बेटियों के लिए जिन पर वर्तमान मलेच्छों की बुरी नज़र है। "
ये चीखें नहीं एक दहाड़ है , जो यह कहता है की ,"हे हिन्दू पुत्रियाँ हर युगों में इन मलेच्छों से सतर्क रहना। " ये चीखें नहीं एक आत्मबल है जो यह कहता है कि," हे हिन्दू पुत्रियाँ तुम अबला नहीं सबला हो ।" ये चीखें नहीं एक वेदना है जो यह कहती हैं की, " हे हिन्दू वीरों और वीरंगनाओं हमें भूल न जाना। "
महारानी पद्मावती जी हम सहस्त्र जन्म लेकर भी आपका उपकार नहीं चुका पाएँगे।
जौहर गाथा याद, उपेक्षा में गुम स्थल
ऐतिहासिक धरा चित्तौडग़ढ़ के गौरवशाली व स्वाभिमानी इतिहास की प्रतीक रानी पद्मिनी समेत हजारों वीरांगनाएं हैं। इनके जौहर की गाथाएं सदियों तक भुलाई नहीं जा सकती, मगर जौहर स्थलों की पहचान के लिए जिम्मेदार विभाग की उपेक्षा से गुम होने की स्थिति में हैं।
तीन जौहर स्थलों में से दो के बारे में लोग लगभग अनजान,,,,,
ऐतिहासिक धरा चित्तौडग़ढ़ के गौरवशाली व स्वाभिमानी इतिहास की प्रतीक रानी पद्मिनी समेत हजारों वीरांगनाएं हैं। इनके जौहर की गाथाएं सदियों तक भुलाई नहीं जा सकती, मगर जौहर स्थलों की पहचान के लिए जिम्मेदार विभाग की उपेक्षा से गुम होने की स्थिति में हैं। तीन जौहर स्थलों में से दो के बारे में लोग लगभग अनजान हैं।
चित्तौड़ का गौरवशाली इतिहास तीन जौहर का साक्षी रहा है। इनमें हजारों वीरांगनाओं ने अपनी आन-बान की रक्षा के लिए धधकती ज्वाला में कूदकर प्राणों की आहुतियां दी थी। मुगलों व आक्रांताओं के आक्रमण के समय ये तीनों जौहर हुए हैं।
यही हाल यहां,,,दो अन्य जौहर स्थलों में एक कुंभा महल में गौमुख कुंड के पास सुरंग तथा दूसरा पद्ममिनी महल के पास बताया जाता है। इनका भी जिक्र न जौहर स्थली के रूप में है और न यहां जौहर करने का संकेत चिन्ह लगा है। इनके बारे में आम लोगों को कोई जानकारी नहीं है।

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विभाग है उदासीन,,जौहर स्थलों का विकास करना तो दूर पहचान दिलाने के प्रति भी पुरातत्व विभाग उदासीन है। दुर्ग में अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के समीप उनका नाम लिखने के साथ ही उसके इतिहास की संक्षिप्त जानकारी लिखे बोर्ड या शिलालेख लगे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि जौहर के लिए देश में पहचान रखने वाले स्थान पुरातत्व विभाग के कारण उपेक्षित हैं।
कई बार की मांग,,जौहर स्थलों की पहचान व विकास की मांग लेकर जौहर संस्थान समेत अन्य लोग प्रयास कर चुके हैं। संस्थान के कोषाध्यक्ष नरपतसिंह भाटी बोले, इस बारे में संस्थान ने पुरातत्व विभाग को कई पत्र लिखे मगर विभाग ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।
मालूम हो, प्राचीनकाल में शत्रु के हमले के दौरान राजा और सैनिक वीरगति को प्राप्त होते थे, तब संकट निकट देख रजपूती आन-बान को सुरक्षित रखने के लिए महिलाएं, बच्चे व अशक्त स्वाभिमान बचाने को चिता सजा जौहर की आग में प्राणों की आहुति दे देते थे।
ऐसे हुए तीन जौहर???
चित्तौड़ का पहला जौहर सन 1303 में हुआ, जब अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। रूपवान रानी पद्मिनी को देखने की लालसा में अलाउद्दीन ने यहां पड़ाव डाला।
राणा रतनसिंह की पत्नी पद्मिनी ने चतुराई से शत्रु का सामना किया। अपनी मर्यादा व रजपूती स्वाभिमान की खातिर पद्मिनी ने विजय स्तम्भ के समीप 16 हजार रानियों, दासियों व बच्चों के साथ जौहर की अग्नि में स्नान किया था। गोरा और बादल जैसे वीरों ने भी इसी समय पराक्रम दिखाया था।
आज भी विजय स्तंभ के पास यह जगह जौहर स्थली के रूप में पहचानी जाती है। इतिहास का सबसे पहला और चर्चित जौहर स्थल इसे माना जाता है, लेकिन यह अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की उपेक्षा का शिकार है। पहचान के नाम पर यहां महज छोटा संकेत बोर्ड लगा है।
इस स्थल का विकास न के बराबर है। चित्तौडग़ढ़ का दूसरा जौहर सन 1535 में हुआ, जब गुजरात के शासक बहादुरशाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। उस समय रानी कर्णावती ने संकट में दिल्ली के शासक हूमायूं को राखी भेज मदद मांगी। कर्णावती ने शत्रु की अधीनता स्वीकार नहीं की और 13 हजार रानियों के साथ जौहर किया।
तीसरा जौहर सन् 1567 में हुआ जब अकबर ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। तब रानी फूलकंवर ने हजारों रानियों के साथ जौहर किया। जयमल और फत्ता भी इसी युद्ध में शहीद हुए।


मोदीजी ने क्या ऐसा किया , जो जापान ने भारत के साथ युद्धाभ्यास किया, जो बुर्ज खलीफा तिरंगे में रंगा दिखने लगा ?

एक तरफ कांग्रेस है जिसने तिब्बत चीन के कबजे में जाने पर ये कहकर वचाव किया कि ले जाने दो बंजर जमीन थी।
दूसरी तरफ मोदी जी ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम लेकर आये। अमेरिका से नुक्लेअर रिएक्टर के लिए साइन करवाये।
एयर बस को हिंदुस्तान में डेवलपमेंट सेंटर डालने के लिए राजी किया।
तुर्कमेनिस्तान में पहल कर  करके उसकी अकूत गैस में अपनी हिस्सेदारी हासिल की।
बाकी चीन से सभी परिचित हैं। स्ट्रिंग ऑफ पर्ल मतलब समुद्री घेराब वो भी कांग्रेस शाशन काल में।
चीन के हर उस दुश्मन के दरवाजे जाना, यहां तक जापान जो किसी युद्ध में हिस्सा नही लेगा लेकिन सामरिक ओर कूटनीतिक दृष्टि में अहम भूमिका निभाएगा।
पागल नही हैं मोदी जी ब्रत में नींबू की शिकंजी पीकर देश विदेश भागे भागे फिरते रहे।


Dubai's Burj Khalifa lights up in colours of Indian flag; PICS massively go viral on social media
एक समय था कि अफगानिस्तान में बौद्ध मंदिरों को तोपों से उड़ा दिया गया था...,,और, आज वहाँ के राष्ट्रपति हमारे मुल्क के इतने पक्के दोस्त हैं कि हमारे देश पे आतंकवादी हमला हुआ तो उन्होंने दक्षेस सम्मलेन में पाक जाने से मना कर दिया!

एक समय था जब ईरान हमारी एक नहीं सुनता था.......आज उन्हीने भारत को चाबहार बंदरगाह बनाने और ईरान में अपनी फौजें रखने की इज़ाज़त दे दी!एक समय था कि नार्थ ईस्ट में terrorists हमला करके म्यांमार भाग जाते थे...,,आज वहाँ की सरकार के सहयोग से इंडियन आर्मी ने वहीं जा के उनके terrorist camps तबाह कर दिए!

एक समय था जब खाड़ी देश पाक का साथ देते थे, दाऊद बरसों तक दुबई में शरण लिए रहा......आज सऊदी अरब ने दाऊद की संपत्ति ही जब्त कर ली! एक समय था जब खाड़ी देश भारत को कमजोर और गरीब समझते थे.....आज अचानक क्या हुआ जो उन्हीने भारत के PM के आगमन पे अपने यहाँ पहला हिन्दू मंदिर बनाने के लिए जमीन दे दी! आज अचानक क्या हुआ...? जो बुर्ज खलीफा तिरंगे में रंगा दिखने लगा?

आज अचानक क्या हुआ...?जो भारत में इतनी हिम्मत आ गयी कि चीन के अरुणांचल के बॉर्डर में सड़कें बना ली, हवाई पट्टी बना ली, 100 मिसाइल भी तैनात कर दिए और टैंक की डिवीजन पोस्ट कर दी! आज अचानक क्या हुआ...? जो USA के नवनिर्वाचित प्रेजिडेंट ने रूस , चीन, पाकिस्तान आदि देशों से पहले भारत के PM को फोन करके आभार व्यक्त किया!

आज अचानक क्या हुआ...? जो ऑस्ट्रेलिया, इंडिया को यूरेनियम देने को राजी हो गया...!आज अचानक जापान ने इंडिया के साथ युद्धाभ्यास किया..!! 
तब, मन ने जवाब दिया कि ये सब परिवर्तन आये मात्र #तीन_साल_में_नरेंद्र_मोदी_के_आगमन_के_साथ.

Madhukar Kumar....Bhupendra Singh

गोगोई की बुद्धिमत्ता पर प्रश्न चिन्ह लगाने वालो को जवाब सेना ने एक दिन में दस को ठोक कर दिया !

कश्मीर में भारतीय सैनिकों ने 24 घंटे के अंदर मार गिराए 10 आतंकवादी : सेना ने शनिवार को कहा कि कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के प्रयासों को नाकाम करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के तहत शुक्रवार शाम से 10 आतंकवादी मारे गए हैं.!उत्तरी कमान के रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा बलों के निरंतर अभियानों ने रमज़ान के पवित्र महीने से पहले राज्य में आतंकवाद फैलाने के पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रायोजित एजेंटों के प्रयासों को नाकाम कर दिया है !

उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में 10 सशस्त्र घुसपैठियों और आतंकवादियों का सफलतापूर्वक सफाया कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि रामपुर सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में 6 सशस्त्र घुसपैठियों का सफाया कर दिया गया.उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी एक अन्य अभियान में अब तक दो आतंकवादी मारे गए हैं. ये अभियान दक्षिण कश्मीर के त्राल में स्थानीय सूत्रों से मिली विशिष्ट जानकारी पर आधारित था !


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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के त्राल में शनिवार को सेना के साथ मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर का नया पोस्टर ब्वॉय सबज़ार अहमद भट मार गिराया गया. उसे बुरहान वानी का करीबी माना जाता था. बुरहान की मौत के बाद उसे हिजबुल का नया कमांडर नियुक्त किया गया था. उसके ऊपर 10 लाख रुपए का इनाम भी था !बताया जाता है कि वह एक लड़की से प्यार करता था. लेकिन लड़की के परिवार वालों ने उसके शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. इसके बाद उसने आतंक की राह पकड़ ली !.

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Root cause of Kashmir trouble are drug and religion. This cocktail is very potent.........     Kaul Ashok

भट के मारे जाने की खबर जंगल में आग की तरह फैलने के बाद घाटी में 50 से अधिक स्थानों पर हिंसा शुरू हो गई पत्थरबाजी करने वाले युवक श्रीनगर, त्राल और घाटी के कई बड़े और छोटे शहरों में सड़कों पर उतर आए और सुरक्षा बलों पर हमला किया।

त्राल में उप जिला अस्पताल के एक अधिकारी के अनुसार 19 घायलों को वहां भर्ती कराया गया है।इनमें से छह को गोली लगी है जबकि 13 अन्य को छर्रे लगे हंै।सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष के दौरान अनंतनाग जिले में मट्टन इलाके में एक किशोर समीर अहमद के सिर में आंसू गैस का गोला लगा। उसे यहां एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर है।


शोपियां जिले में इसी तरह के प्रदर्शन में पांच लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि समूची घाटी में घायल हुए लोगों की संख्या दिन समाप्त होने तक बढ़ सकती है क्योंकि कई हिस्सों से संघर्ष की खबरें आ रही हैं।अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर में संघर्ष में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घाटी में हालात बिगड़ने पर घबराए लोग श्रीनगर में अपने घरों की ओर भागे जिससे यातायात जाम हो गया और स्कूलों को निर्धारित समय से तीन घंटे पहले बंद कर दिया गया।अलगाववादियों ने दो दिन के बंद की घोषणा करने के दौरान 30 मई को भट और आज मारे गए सात अन्य आतंकवादियों को श्रद्धांजलि देने के लिए त्राल मार्च का भी आह्वान किया है।


Tanmay Modh



हरीश साल्वे के व्यक्तित्व के बारे में थोड़ी और जानकारी भी देख ले !

आजकल #हरीश_साल्वे की इस बात पर खूब प्रशंसा हो रही है कि ICJ में कुलभूषण जाधव केस को रिप्रेजेंट करने के लिए उन्होंने केवल एक रुपया फीस के तौर पर लिया !
मैं इस #व्यक्तित्व के बारे में थोड़ी और जानकारी देता हूँ!
हरीश साल्वे के पिता का नाम N.K.P साल्वे है .
एक ज़माने में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं, और गांधी फॅमिली के करीबी भी ...
क्या राजनीति, क्या क्रिकेट, हर जगह उनका दखल था .! BCCI के अध्यक्ष भी रहे .!

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N.K.P साल्वे यही नहीं रुके . उन्होंने व्यापार जगत में ऐसा पांव पसारा कि एक समय उनकी गिनती सबसे अमीर नेताओं में होने लगी !
नागपुर बेल्ट में जितने अमीर नेता हैं उन सबके के कही न कहीं प्रेरणाश्रोत रहे हैं साल्वे साहब ...!
क्या शिक्षा क्षेत्र , क्या माइनिंग N.K.P साल्वे ने खूब माल कमाया .....! हज़ारों करोड़ का एम्पायर खड़ा किया!
खैर
उन्ही के सुपुत्र हरीश साल्वे ने एक वक्त कहा मुझे आपकी दौलत में कोई रूचि नही है . मुझे कुछ नही चाहिए. ये सारा साम्राज्य मेरी बहन के नाम कर दीजिये . केवल पुश्तैनी मकान मेरे नाम कर दीजिये और ठीक ऐसा ही हुआ . काले पीले ढंग से कमाया गया विशाल साम्राज्य N.K.P ने अपनी पुत्री " अरुन्दती " के नाम कर दिया . आज पूरा व्यापार अरुन्दती देखती है और हरीश साल्वे कभी कभार अपने पुश्तैनी मकान पर जाकर फुर्सत के पल गुजारते हैं ......!
और
उन्होंने बता दिया कि, #इंसान दौलत से बड़ा नही होता बल्कि #चरित्र से बड़ा होता है !
#सत्यमेव__जयते 🙏🏼

Sunil M Gupta

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगन के सामने दुनिया मानो सिकुड़ सी गई है, पूरी दुनिया को अपना दफ्तर बना लिया ।



इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को बना लिया अपना दफ्तर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगन के सामने दुनिया मानो सिकुड़ सी गई है। उन्हें अपनी आक्रामक विदेश नीति के मद्देनजर दुनियाभर का दौरा करने की जरूरत है, इसलिए मोदी को अच्छी तरह पता है कि कैसे पूरी दुनिया को ही अपने दफ्तर में तब्दील कर दिया जाए। यही वजह है कि अपने कार्यकाल का तीन साल पूरा करने के बाद भी उनकी ट्रैवल स्टाइल में कोई फर्क नहीं आया है। इसी क्रम में वह अगले महीने यूरोप और इस्राइल का दौरा करने वाले हैं।
45 देशों का दौरा, अभियान जारी है : मई 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से मोदी आधिकारिक विदेश यात्रा के रूप में कथित रूप से 3.4 लाख किलोमीटर का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने बतौर पीएम 45 देशों में 119 दिन बिताए हैं। यह अवधि उनके अब तक के कार्यकाल का करीब 10 प्रतिशत है।
विदेश यात्रा में मनमोहन के मुकाबले मोदी की उपलब्धियां ज्यादा : मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले दो वर्षों में कुल 95 दिन विदेश में बिताए जबकि यूपीए की पहली और दूसरी सरकार में बतौर पीएम पहले दो-दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान मनमोहन सिंह ने 72 दिन विदेश में बिताए थे। लेकिन, मोदी ने जहां 20 यात्राओं में 40 देशों के दौरे किए, वहीं मनमोहन सिंह ने यूपीए-1 के पहले दो सालों में 15 विदेशी यात्रा कर 18 देशों के दौरे किए थे। उन्होंने यूपीए-2 के पहले दो सालों में 17 विदेशी यात्राओं में 24 देशों के दौरे किए थे।

मोदी का पसंदीदा ठिकाना : मोदी कौन-कौन से देश बार-बार जाते हैं, इससे आपको उनकी विदेशी नीति की दिशा का अंदाजा लग सकता है। उन्होंने नौ देशों की बार-बार यात्रा की है। वह चार बार अमेरिका गए हैं जबकि चीन, फ्रांस, अफगानिस्तान, जापान, नेपाल, रूस, सिंगापुर, श्री लंका और उज्बेकिस्तान का दो-दो बार दौरा कर चुके हैं।

पल-पल के उपयोग की अनोखी कला : विदेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी एक-एक सेकंड का हिसाब-किताब रखते हैं। उन्होंने विदेशी यात्रा के दौरान वक्त बचाने का शानदार तरीका इजाद कर लिया है। वह होटल के बजाय प्लेन में सोते हैं। उड़ान के वक्त प्लेन में सोने से सुबह उनकी नींद उसी देश में खुलती है जहां उनका अगला कार्यक्रम होता है। अगर वह रात में होटल में रुक रहे होते तो वह सुबह जगने के बाद ही नई जगह पर पहुंच पाते।

पिछले साल 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच बेल्जियम, अमेरिका और सऊदी अरब की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने तीन रातें एयर इंडिया वन में ही बिताईं जब वह दिल्ली से ब्रसल्स, ब्रसल्स से वॉशिंगटन डीसी और वॉशिंगटन डीसी से रियाद का सफर कर रहे थे। पूरे दौरे में उन्होंने महज दो रातें होटलों में बिताईं- एक रात वॉशिंगटन में और दूसरी रियाद में। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, 'किसी पीएम के अमेरिका समेत कई देशों का दौरा महज 97 घंटों में पूरा करने का यह पहला उदाहरण है। पीएम अगर प्लेन में नहीं सोते तो हम कम-से-कम छह दिनों में तो नहीं ही लौट पाते।'
प्लेन में भी गहरी नींद सोते हैं पीएम : क्या अलग-अलग देशों के दौरे से मोदी को नींद नहीं आने की समस्या नहीं झेलनी पड़ती है? भला नींद से सराबोर कोई पीएम दूसरे देश के प्रमुख के साथ महत्वपूर्ण मीटिंग में क्या हासिल कर सकते हैं? एक अधिकारी ने एक बार कहा था, 'उन्हें अनिद्रा की समस्या खाक होगी, जब उन्हें गहरी नींद आ जाती है।' दरअसल, पीएम मोदी कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति हैं। इसलिए वह यात्रा के दौरान ऐसी समस्याओं का सामना करना अच्छी तरह जानते हैं।

प्लेन ही बन जाता है पीएमओ : पीएम मोदी प्लेन में भी सिर्फ सोते ही नहीं रहते हैं। एक अधिकारी ने ईटी को बताया, 'जब सफर का कोई हिस्सा पूरा हो जाता है तो वह (पीएम मोदी) प्लेन में इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांग लेते हैं। अधिकारियों को इतनी छूट नहीं मिलती है कि वो भारत लौटकर ही रिपोर्ट दें।' इतना ही नहीं, 'जब किसी देश में महत्वपूर्ण मीटिंग होनी होती है तो पीएम होटल में प्रवेश करने के 30 मिनट के अंदर ही ब्रीफिंग का बुलावा भेज देते हैं।'

अब दौरे में कमी : मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले साल में ही ज्यादा-से-ज्यादा दौरे किए क्योंकि तब बतौर पीएम उन्हें बहुत ग्राउंड वर्क करना था। धीरे-धीरे उनकी विदेश यात्राओं में कमी आ गई। साल-दर-साल विदेश में उनके ठहरने का वक्त भी कम हुआ है। पहले साल (मई 2014 से मई 2015) पीएम ने 55 दिन दूसरे देशों में बिताए। दूसरे साल में यह आंकड़ा घटकर 40 और तीसरे साल 24 हो गया।

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मोदी की यात्रा का खर्च : पीएमओ की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी के हवाई सफर पर 275 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें पांच यात्राओं पर खर्च के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 9 से 17 अप्रैल 2015 के दौरान फ्रांस, जर्मनी और कनाडा की यात्रा पर सबसे ज्यादा 31.2 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस लिहाज से दूसरे नंबर पर 11 से 20 नवंबर 2014 के दौरान म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और फीजी की यात्रा है जिसकी लागत 22.58 करोड़ रुपये आई। पीएम मोदी की तीसरी महंगी विदेश यात्रा 13 से 17 जुलाई 2014 के दौरान ब्राजील की थी जिस पर 20.35 करोड़ रुपये का खर्च आया।



अगले दो वर्षो के कार्यो के बारे में नरेन्द्र मोदी ने कुछ नई प्राथमिकताओ के संकेत दिए !

मिशन 2019 के लिए मोदी ने दिए ये संकेत
गुवाहाटी से प्रधानमंत्री ने जब अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया तो यह संकेत भी था कि बाकी बचे दो वर्षों में सरकार और बीजेपी की क्या प्राथमिकता रहेगी और 2019 के आम चुनाव में वह किन मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगे। जानते हैं असम से देश के नाम संबोधन की 5 अहम संकेत और बातें:
ओबीसी बड़ी ताकत
पीएम ने अपने भाषण में ओबीसी कमिशन के बहाने पिछड़ी जातियों की विशेष रूप से चर्चा की। हाल के दिनों में यूपी समेत बीजेपी की बड़ी चुनावी सफलता में पिछड़ी जातियों का उनके पक्ष में जाना सबसे बड़ा फैक्टर रहा है। एक ब्लॉक के रूप में भी यह सबसे बड़ा वोट बैंक है। ऐसे में सरकार 2019 से पहले पिछड़ी जातियों के बीच पकड़ और मजबूत करने के लिए कुछ दिनों में इनके लिए और योजनाएं लागू कर सकती है। मोदी खुद को गरीबों-पिछड़ों के पीएम के रूप में भी पेश करना चाहते हैं।
न्यू इंडिया की बात
पीएम ने जिस तरह 2014 के आम चुनाव में अच्छे दिन लाने के वादे को सबसे अहम हथियार बनाया था, 2019 में वह न्यू इंडिया बनाने के वादे के साथ उतरेंगे। पीएम ने भाषण में संकेत दिया कि पहले तीन साल में उन्होंने अपनी ऊर्जा सिस्टम को ठीक करने में लगाई। माहौल को बदलने में सफलता पाई। दरअसल वह इस आलोचना का जवाब दे रहे थे कि जमीन पर उतना असर अभी दिखा नहीं। मोदी ने कहा कि आगे नई ऊर्जा से देश को ले जाएंगे। ऐसे में वह अगले पांच साल के रोडमैप के साथ जाएंगे।
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विपक्ष नजरअंदाज
मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष को लगभग इग्नोर किया। इससे पहले अपने दो वर्षों के संबोधन में उन्होंने विपक्ष पर करारे हमले किए थे। लेकिन तीन साल बाद मोदी ने संकेत दिया कि अब जनता के बीच काम करने का वक्त है।
करप्शन के नाम पर लड़ेंगे
मोदी ने भाषण में सबसे अधिक फोकस करप्शन के खिलाफ उठाए तमाम कदमों को पर रखा। नोटबंदी से लेकर बेनामी कानून का विस्तार से जिक्र किया। 2019 में मोदी करप्शन के खिलाफ उठाए कदमों के साथ ही वोटरों के बीच जाना चाहते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में करप्शन के खिलाफ मोदी सरकार और बड़े कदम उठा सकती है। 2014 में भी उन्होंने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था।
स्मार्ट सिटी, बुलेट का जिक्र नहीं
मोदी ने तीन साल की उपलब्धि में अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान का जरूर जिक्र किया, लेकिन बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी जैसे पनी पसंदीदा प्रोजेक्ट का जिक्र नहीं किया। रोजगार पर भी कुछ बड़ी बात नहीं की। मिडिल क्लास के मुद्दों को भी नजरअंदाज किया।

Tanmay Modh

जातियां का भेदभाव इस देश का नासूर हैं, अब समय आ गया है इसका खात्मा होना ही चाहिए।




"आर्मी " सिर्फ वही हो सकती है जो देश की रक्षा के लिए लड़े ..अपना ही घर जलाने वाले " आर्मी" नहीं "आतंकी " होते हैं...#भीमआर्मी ! जातियों से ज्यादा विभाजनकारी व्यवस्था कहीं नहीं देखी गयी हैं.. सैकडो साल की गूलामी, मुट्ठी भर आक्रमणकारीयों से पिट जाना, समाज में समायी हिंसात्मक प्रवृत्ति, आदि आदि...


सब जातियों की देन हैं... समाज के बडे हिस्से को जाति के नाम पर नारकीय यातनाएं देना, जीवन जीने की न्यूनतम आवश्यकताओं से महरूम कर देना, किसी को योग्यता छोडकर केवल जाति के नाम पर गैर मानना, अपने से नीचा मानना, इससे बडी अहमकाना सोच कहीं हो ही नहीं सकती....परिवर्तन वक्त का सबसे बडी नियम हैं... महज 100 साल पहले तक जानवरो की तरह जंजीरों में जकडे जाने वाले अमेरिका के निग्रो राष्ट्रपति बन गये, विल स्मिथ हालीवुड पर राज कर बैठा, पुलिस सेना हर जगह समुचित प्रतिनिधित्व... वो भी बिना आरक्षण की बैसाखी के...

हमारे यहां भी ऐसे उदाहरण हैं, लेकिन सवाल समाज में समायी हुई सोच का हैं.. किसी दलित की तरक्की 10 में से 8 स्वर्ण को चुभती हैं..21 सदी में भी अन्याय और अत्याचार के ढेरो मामले आपको मिल जायेंगे....

डा भीमराव अम्बेडकर एक महान व्यक्तित्व के स्वामी थे.. उन्होंने उस समय रूढिवादिता का विरोध किया जब गैरबराबरी के नियम चरम पर थे, सविधांन के अधिकाँश हिस्से के निर्माता की मूर्ति लगने से जो की दलित समाज लगाता हैं, तनाव व्याप्त होना समझ से बिल्कुल परे हैं...
आप अपनी बेटी की शादी के लिए वर ढूढतें समय देखियेगा साहेबान 116 अरब की आबादी वाले इस देश में आपके पास विकल्प कितने सीमित हैं.. अपनी जाति, उपजाति, सब कुछ संकुचित सा, छोटा सा,...

जातियां इस देश का नासूर हैं.. इन्हें खत्म करना ही चाहिए। आरक्षण का रोना रोने वालो को ये याद रखना चाहिए। वे कितने दलित बहन भाइयों को समाज में उनका सम्मानित स्थान देने को तैयार हैं...

भीम आर्मी जैसे संगठनों और सडक पर खडी सार्वजनिक सम्पति को जलाते समय दलित भी ये याद रखे ये देश उनका ही हैं.. उसका नुकसान उनका अपना नुकसान हैं... स्वर्ण जातियों से उनकी अँधविरोधी नफरत उन्हें भी उसी कैटगरी में खडा करती हैं, जिनके लिए केवल एक शब्द कहा जा सकता हैं,.....




आज से कोई भाई किसी हिन्दू जाति के बारे में कुछ भी आपतिजनक नहीं लिखेगा और न कोई वीडियो डालेगा यदि कोई भी किसी के इतिहास को गलत लिखता है या किसी जाति के बारे में झूटी बातें लिखकर फेसबुक पर डालता है किसी को भड़काता है किसी के पूर्वजों महापुरुषों के बारे में गलत पोस्ट डालता है उसकी तुरंत रिपोर्ट पुलिस थाने में कराएं कुछ आवारा लड़के फुक्करे एक दूसरी जातियों के बारे में लिखकर और अनेक ग्रुप बनाकर गाली गलोच एक दूसरी जाति से करकर नफरत फैला रहे हैं ये आवारा कोई काम धंधा तो करते नहीं और मुझे पता है इनकी उम्र केवल 17 साल से 25 की बीच है ये फुक्करे हिन्दू जातियों में जहर घोल रहे हैं इन आवारा आराजकवादी भोंकुओं की अब खर नहीं मेरी पूरी नजर इनकी हरकतों पर रहेगी इनकी रिपोर्ट मैं खुद करवाऊंगा और कोर्ट में भी मुकदमा करूँगा! चाहे वो अपने समाज के हों चाहे दूसरे!


Bhupendra Surana
Rohit Tevatya

दलित चिंतकों में नब्बे शतांश स्वर्ण और ब्राह्मण ही है कोई दलित नेता नही ! इतिहास गबाह है।।


Kumar Gyanendra ji कहते है कि  चाहे आपके ऑफिस का चपरासी ,चाहे आपको ढोने वाले रिक्सा चालक, समाज मे दल के अंत मे चलने वाला हर व्यक्ति दलित था, दलित है और उस दलित का उन्मूलन ही समाज का असल कर्तव्य है, चाहे समाज सभी वर्णों से परिपूर्ण तथा कथित सवर्णों का ही क्यों ना हो।

बहुत जानकर आश्चर्य हुआ कि भीम आर्मी की बागडोर कुछ नवयुवकों ने संभाला और जंतर मंतर पड़ भी पहुचे, आसपास के राजपूत पड़ोसियों से लड़कर ब्राह्मणवाद को थोड़ा बहुत आंशिक नस्तेनाबूत भी किया। मुझे भीम आर्मी का मतलब महाभारत वाला भीम समझ मे आता था, परन्तु संविधान के निर्माता दादा साहब का नाम लेकर संविधान तोड़ने वालों ने अपना नाम भीम आर्मी रखा है इससे बेहतर श्रधांजलि भीमराव अंबेडकर साहेब को कौन दे सकता है।
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Saharanpur violence: On the run, Bhim Army chief appears at Jantar Mantar, says will surrender. Chandrashekhar is named in one of the 24 FIRs registered by UP Police for his alleged role in instigating violent protests by Dalits in Saharanpur on May 9.
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बहुत से सवर्ण धुरंधरों का धुआँधार कॉमेंट भी आया कि अब नही चलेगा, फिर से तलवार उठा लेंगे, रणवीर सेना फिर पैदा होगी बगैरह बगैरह। महोदय ,क्या आपने रणवीर सेना बनाई थी? क्या आपके कोई समर्थक रणवीर सेना के लोगों को जेल में कभी खाना भी पहुचाया? गोतिया भाई पड़ोसी से लड़ा हुआ हो गया?

जमीन का दखल बेदखल का फैसला ?आप 1000 -2000 युवक को उग्र करवा के मरबाइयेगा और कुछ नही। गांधी मैदान में बैठक कीजिए 5 सेल्फी पोस्ट कीजिए हो गया ना, पर्सनल काहे लेते हैं?कौन आपका ससुरार सहारनपुर ही है? आरा छपडा नालंदा, नबादा, बेगूसराय, भागलपुर सम्भल गया?

हम तो समर्थन में हैं भीम आर्मी के, जो बनेगा करेंगे। इंद्रा गरीबी हटा दी ,मोदी जी काला धन ले आए, अरविंद भ्र्ष्टाचार मिटा दिए वैसे ही ये आर्मी ब्राह्मणवाद मिटा दे, आपको क्या दिक्कत है ।आपको ब्राह्मणवाद पता है?

पता तो इनको भी नही है कि दलित चिंतकों में 90 फिशदी स्वर्ण ही थे जिसमें से 70 फिशदी सिर्फ ब्राह्मण। जिस अम्बेडकर के नाम पर ये भीम आर्मी खुली है जब उनका समर्थन संविधान सभा के सभी ब्राह्मण करते ही थे, अम्बेडकर की आजीवन सहायता ब्राह्मण ने ही कि तो आप भी कीजिए भीम आर्मी की । क्योंकि इनको सहायता कोई दलित नेता नही करेगा, पलट के देख लीजिए इतिहास गबाह है।

Encyclopaedia of Events Leading to GST in India.

Encyclopedia of events leading to GST in India.
The GST Council will likely approve the tax rates on services and all categories of goods by evening today.
GST promises to stitch together a common national market by replacing a string of central and local levies such as excise, value added tax, octroi, service tax.
The government plans to introduce GST from July 1, 2017, more than 11 years after a formal process to introduce it began.

GST: One country, one tax


Here’s a look back at how GST, independent India’s biggest reform initiative, has reached the final leg:
2006 - FM P Chidambaram moots GST in the Budget Speech for 2006-07
2008 - Empowered Committee of State Finance Ministers (EC) engaged
2009 - EC releases its First Discussion Paper
2011 - FM Pranab Mukherjee introduces Constitution Amendment Bill on GST in Lok Sabha
2013, Aug - Parliamentary Standing Committee submits report on GST; recommendations incorporated in the Bill
2013, Sep - Revised Bill sent to EC for consideration
2014, Mar - Another revised Bill drafted incorporating recommendations of EC

             GST, TaxAll you need to know about the GST rate card

2014, Dec - FM Arun Jaitley introduces Constitution Amendment Bill for GST in Lok Sabha
2015, May - LS Passes Constitution Amendment Bill for GST
2015, Aug - Congress insists on capping GST rate at 18%; opposes 1 percent “entry” tax to protect manufacturing states as it distorts the system
2016, July - Centre and states agree against capping GST rate in the Constitution amendment Bill
2016, Aug - Parliament passes 122nd Constitution Amendment Bill for GST; clause on entry tax dropped; states assured of full compensation for potential revenue loss upto five years
2016, Oct 18 - GST Council decides on a compensation formula for states for revenue loss
2016, Oct 26 - FM Arun Jaitley writes blog favouring four-tiered GST tax structure
2016, Nov 03 - GST Council agrees on a four-slab structure –5, 12, 18 and 28 percent—along with a cess on luxury and `sin’ goods such as tobacco
2016, Nov 04 - GST council meeting inconclusive as Centre, states fail to agree on GST administrative issue on “dual control”
2016, Nov 12 - GST council fails to agree on CGST and SGST laws
2016, Dec 23 - Agreement on two laws in GST council meeting, but “dual control” remains a thorny issue
2017, Jan 03 - States want compensation corpus raised from Rs 55,000 crore to Rs 90,000 crore to soothe demonetisation pain; new roadblocks surface on taxation rights of goods transported through territorial waters
2017, Jan 04 - No breakthrough in GST Council meeting, hopes hinge on Jan 16 meeting to break impasse; roll-out date pushed till July 1
2017, Jan 16 - Centre and states agree on two thorny issues of “dual control” and taxing rights of goods moved through high seas
2017, Feb 18 - GST Council finalizes draft Compensation Bill
2017, Mar 4 - GST Council approves CGST and IGST) Bills
2017, Mar 16 - GST Council State GST Bill and the UT GST Bills.
2017, Mar 20 - Union Cabinet approves CGST, IGST, UT GST and Compensation Bills
2017, March 27 - FM Arun Jaitley introduces CGST, IGST, UT GST and o
2017, March 29 - Lok Sabha passes five GST bills
2017, March 31 - GST council approves five sets of rules involving registration, payment, refund, invoices and returns
2017, May 18 - GST council meets in Srinagar; approves tax rates for 1211 items; approves another four sets of rules relating to composition, valuation, ITC (input tax credit) and the transition process.

Gstguru

सही शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति में सोचने, समझने की क्षमता का विकास और समुचित प्रयोग में निहित है !




"शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति में सोचने और समझने की क्षमता का विकास करना है और यही शिक्षा द्वारा अर्जित ज्ञान की सही अर्थों में उपयोगिता भी, पर जब शिक्षा ही अपने उद्देश्य से भ्रमित हो जाए तो हम एक आदर्श समाज का निर्माण भला कैसे कर सकेंगे ?

आज शिक्षा का मह्त्व केवल जीविका-उपार्जन की दृष्टि से एक सुरक्षित जीवन के आश्वासन के रूप में रह गया है; न सीखना महत्वपूर्ण रहा और न ही ज्ञान , तभी शिक्षा खुद एक व्यवसाय बन गयी है।

ज्ञान की भी एक सीमा है पर कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं और इसीलिए शिक्षा के माध्यम से कल्पनाशक्ति को ज्ञान का बल प्रदान करना ही किसी भी नए सम्भावना का मूल स्त्रोत है, तभी तो, कल्पनाओं में ही नए को जन्म देने का सामर्थ है न की तार्किक क्षमता में , पर जब व्यवहारिकता के नाम पर लोग इतने समझदार हो जाएँ की सुनना, सोचना और समझना छोड़ दें तो स्वाभाविक है की जीवन के लिए समय की आवश्यकता भय सी प्रतीत होगी और तब वह उसे स्वीकार करने के बजाये उनसे बचने का प्रयास करेगा।

सुरक्षित जीवन की आकांक्षा ही अपने आप में एक भ्रम है, ऐसा इसलिए, क्योंकि जीवन अपने स्वाभाव से ही अनिश्चित है पर मृत्यु निश्चित। अतः जीवन अपने प्रयासों का आधार एक सुरक्षित व् समृद्ध जीवन के आकांक्षा के बजाये एक तृप्त मृत्यु को बनाए तो वह सही अर्थों में सार्थक होगी।

ज्ञान की प्राप्ति की प्रक्रिया कोई साधना से कम नहीं और इसीलिए, किसी भी साधक के लिए उपवास, धैर्य और प्रयास की सततता को सीखना महत्वपूर्ण होता है; उपवास साधक को शारीरिक आवश्यकताओं को अपने वश में करना सिखाता है फिर वह चाहे भूख हो या प्यास, धैर्य व्यक्ति को उसकी सीमितता का बोध कराता है और साथ ही यह बतलाता है की इस श्रिष्टि में 'काल-चक्र' से बड़ा कोई नहीं ; प्रयास की सततता साधक की निष्ठां, समर्पण और आत्मविश्वास को प्रतिबिंबित करता है !


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इन सब गुणों का मह्त्व तब है जब शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर समाज के लिए महत्वपूर्ण हो पर जब समाज कुंठित शिक्षा व्यवस्था से इतना संक्रमित हो जाये की समाज में 'पढ़े लिखे बैल ' अत्यधिक संख्या में पाये जाने लगे तो उस परिस्थिति में स्वभाविकतः भूख ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा ;

कोई चाहे इसे कुछ भी कह ले पर मेरी दृष्टि में यह समाज के वैचारिक पतन का प्रत्यक्ष प्रमाण है !

व्यवस्था परिवर्तन असम्भव नहीं पर यह तब तक सफलता पूर्वक नहीं किया जा सकता जब तक प्रयास का केंद्रबिंदु समस्याओं के मूल तत्व पर केंद्रित न हो; चूँकि आज की व्यवस्था प्रणाली जनतंत्र द्वारा शाषित है, इसलिए, जनतंत्र की सफलता जनता और जन प्रतिनिधियों के वैचारिक स्तर पर निर्भर करता है और शुरुआत भी हमें वहीँ से करनी होगी !

शाशन तंत्र की शक्तियों की उपयोगिता भी केवल उनके प्रयोग द्वारा ही सिद्ध की जा सकती है जिसका अधिकार जनतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधि को सौंपती है ; अतः इस दृष्टि से यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है की जनता अपने प्रतिनिधित्व के लिए कैसे लोगों का चयन करती है।

शाशन तंत्र भी अपनी शक्तियों का प्रयोग अथवा दुरूपयोग के लिए शाशक पर निर्भर करता है, इसलिए, अगर समाज अपने सचेतन निर्णय से सामाजिक नेतृत्व का दायित्व किसी मूर्ख व् अभिमानी को सौंप दे तो वह स्वतः ही विषम व्यवस्था की पात्र बन जाती है, और ऐसे में, शाशन तंत्र की शक्तियों को दोष देना व्यर्थ होगा !

यही कारन है की किसी भी राष्ट्र के परम वैभव में उसके शाशक की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। निम्न स्तर के नेतृत्व के बल पर किसी भी समाज के लिए यथार्थ में आदर्श का व्यावहारिक उदाहरण बन पाना संभव ही नहीं ; ऐसे किसी भी प्रयास का परिणाम केवल समय की व्यर्थता को ही सिद्ध करेगा; पर किसी भी गलती की सुधार के लिए उसकी स्वीकृति महत्वपूर्ण होती है ; जब तक हम अपने तर्कों से अपनी गलती को सही ठहराने का प्रयास करते रहेंगे, समस्याएं और जटिल होंगी ;

क्यों न हम अपने भ्रम से बाहर निकलकर वास्तविकता को स्वीकारें, शुरुआत तो यहीं से करनी पड़ेगी !"

देश का नेतृत्व करने वाले नेतावो के ऊपर देश को सही दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी है !



"कल्पना कीजिये की हम सब एक बस पर सवार हैं और बस कहीं तो भी जा रही है, कहाँ जा रही है इससे किसी को कोई मतलब नहीं, सब अपनी अपनी जगह बनाने में व्यस्त हैं ; सब का ध्यान केवल अपने परिक्षेत्र और उसके विस्तार पर है ! आज भारत की यही परिस्थिति है।
भारत वह बस है और हम सवा सौ करोड़ जनता इसकी सवारी ; सब को अपनी अपनी पड़ी है किसी को इस बात से कोई मतलब नहीं की देश कहाँ जा रहा है ..सब के लिए महत्वपूर्ण उनकी सीट और सहूलियतें हैं , ऐसे में, देश को यह कौन समझाए की भले ही आज हम हेंन केन प्रकरेण बस के अंदर अपने लिए अच्छी जगह बना भी लें पर अगर बस ही गलत रास्ते पर चल रही हो तो हम अपने गंतव्य तक कैसे पहुँच पाएंगे ?


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अगर बात केवल चलते रहने की है तो अलग बात है पर क्या हम रास्ते की अनदेखी कर अपने गंतव्य तक पहुँच पाएंगे ? यह आज हम सब के सोचने का विषय है ! अतः हम चालक की भूमिका और प्रदर्शन को अनदेखा नहीं कर सकते।
देश का नेतृत्व करते नेता ही वह चालक हैं जिनके ऊपर देश को सही दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी है पर जब तक आपस में ही व्यस्त रहेंगे हमें यह मालूम ही नहीं चलेगा की हम सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं !

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किसी भी गिलास का मह्त्व उसके खालीपन से होता है क्योंकि जब वह किसी चीज़ से भरा हो तो मह्त्व उस चीज़ का होता है जिससे गिलास भरा है। ऐसे में, यह देखने वाले की मानसिकता पर निर्भर करता है की वह पानी से आधे भरे गिलास को कैसे देखे, आधा भरा -आधा खली या आधा हवा से भरा और आधा पानी से , दोनों में से कोई भी निष्कर्ष गलत नहीं हाँ, पर निष्कर्ष की विभिन्नता दृष्टिकोण और व्यक्ति की मानसिकता का परिचय अवश्य देता है।
जब गिलास आधा पानी और आधा हवा से भरा मान लिया जाएगा तो उसमें नए की सम्भावना ही नहीं बचेगी इसलिए बेहतर यह होगा की क्यों न हम गिलास को आधा भरा और आधा खाली माने !!
इस उदाहरण के माध्यम से मैं बस इतना ही स्पष्ट करना चाहता हूँ की समाज अपने नेतृत्व का दायित्व कैसी मानसिकता को सौंपता है यह उसकी संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण है ; अगर सामाजिक नेतृत्व ही कुंठित हो तो समाज में कुंठा स्वाभाविक है , इसलिए, परिस्थितियों की वास्तविकता के आधार पर समय समय पर देश, समाज और नेतृत्व की समीक्षा आवश्यक हो जाती है ; यही किसी भी प्रगतिशील समाज की वास्तविक अर्थों में पहचान है।
जब व्यक्तिगत आकांक्षाएं समय की आवश्यकताओं पर भारी पड़ने लगती हैं तो समाज में घर्षण स्वाभाविक है, ऐसी किसी परिस्थिति से निपटने के लिए महत्वपूर्ण यह नहीं की कौन क्या सोचता है और समझता है बल्कि मह्त्व इस बात का होना चाहिए की देश और समाज की भलाई किसमे है;
इससे अधिक और क्या कहूं, सभी समझदार हैं और समझदारों के लिए इशारा ही काफी !"