जातियां का भेदभाव इस देश का नासूर हैं, अब समय आ गया है इसका खात्मा होना ही चाहिए।




"आर्मी " सिर्फ वही हो सकती है जो देश की रक्षा के लिए लड़े ..अपना ही घर जलाने वाले " आर्मी" नहीं "आतंकी " होते हैं...#भीमआर्मी ! जातियों से ज्यादा विभाजनकारी व्यवस्था कहीं नहीं देखी गयी हैं.. सैकडो साल की गूलामी, मुट्ठी भर आक्रमणकारीयों से पिट जाना, समाज में समायी हिंसात्मक प्रवृत्ति, आदि आदि...


सब जातियों की देन हैं... समाज के बडे हिस्से को जाति के नाम पर नारकीय यातनाएं देना, जीवन जीने की न्यूनतम आवश्यकताओं से महरूम कर देना, किसी को योग्यता छोडकर केवल जाति के नाम पर गैर मानना, अपने से नीचा मानना, इससे बडी अहमकाना सोच कहीं हो ही नहीं सकती....परिवर्तन वक्त का सबसे बडी नियम हैं... महज 100 साल पहले तक जानवरो की तरह जंजीरों में जकडे जाने वाले अमेरिका के निग्रो राष्ट्रपति बन गये, विल स्मिथ हालीवुड पर राज कर बैठा, पुलिस सेना हर जगह समुचित प्रतिनिधित्व... वो भी बिना आरक्षण की बैसाखी के...

हमारे यहां भी ऐसे उदाहरण हैं, लेकिन सवाल समाज में समायी हुई सोच का हैं.. किसी दलित की तरक्की 10 में से 8 स्वर्ण को चुभती हैं..21 सदी में भी अन्याय और अत्याचार के ढेरो मामले आपको मिल जायेंगे....

डा भीमराव अम्बेडकर एक महान व्यक्तित्व के स्वामी थे.. उन्होंने उस समय रूढिवादिता का विरोध किया जब गैरबराबरी के नियम चरम पर थे, सविधांन के अधिकाँश हिस्से के निर्माता की मूर्ति लगने से जो की दलित समाज लगाता हैं, तनाव व्याप्त होना समझ से बिल्कुल परे हैं...
आप अपनी बेटी की शादी के लिए वर ढूढतें समय देखियेगा साहेबान 116 अरब की आबादी वाले इस देश में आपके पास विकल्प कितने सीमित हैं.. अपनी जाति, उपजाति, सब कुछ संकुचित सा, छोटा सा,...

जातियां इस देश का नासूर हैं.. इन्हें खत्म करना ही चाहिए। आरक्षण का रोना रोने वालो को ये याद रखना चाहिए। वे कितने दलित बहन भाइयों को समाज में उनका सम्मानित स्थान देने को तैयार हैं...

भीम आर्मी जैसे संगठनों और सडक पर खडी सार्वजनिक सम्पति को जलाते समय दलित भी ये याद रखे ये देश उनका ही हैं.. उसका नुकसान उनका अपना नुकसान हैं... स्वर्ण जातियों से उनकी अँधविरोधी नफरत उन्हें भी उसी कैटगरी में खडा करती हैं, जिनके लिए केवल एक शब्द कहा जा सकता हैं,.....




आज से कोई भाई किसी हिन्दू जाति के बारे में कुछ भी आपतिजनक नहीं लिखेगा और न कोई वीडियो डालेगा यदि कोई भी किसी के इतिहास को गलत लिखता है या किसी जाति के बारे में झूटी बातें लिखकर फेसबुक पर डालता है किसी को भड़काता है किसी के पूर्वजों महापुरुषों के बारे में गलत पोस्ट डालता है उसकी तुरंत रिपोर्ट पुलिस थाने में कराएं कुछ आवारा लड़के फुक्करे एक दूसरी जातियों के बारे में लिखकर और अनेक ग्रुप बनाकर गाली गलोच एक दूसरी जाति से करकर नफरत फैला रहे हैं ये आवारा कोई काम धंधा तो करते नहीं और मुझे पता है इनकी उम्र केवल 17 साल से 25 की बीच है ये फुक्करे हिन्दू जातियों में जहर घोल रहे हैं इन आवारा आराजकवादी भोंकुओं की अब खर नहीं मेरी पूरी नजर इनकी हरकतों पर रहेगी इनकी रिपोर्ट मैं खुद करवाऊंगा और कोर्ट में भी मुकदमा करूँगा! चाहे वो अपने समाज के हों चाहे दूसरे!


Bhupendra Surana
Rohit Tevatya